प्रयागराज | इतिहास
प्रयागराज का खुसरो बाग शहर की उन ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है, जहां वास्तुकला के साथ-साथ मुगलकाल की कई महत्वपूर्ण घटनाओं की कहानी भी देखने को मिलती है।
चारदीवारी से घिरे इस परिसर में शाह बेगम, शहजादा खुसरो और निथार बेगम से जुड़े मकबरे मौजूद हैं। बलुआ पत्थरों से बने इन मकबरों की नक्काशी, मेहराब, गुंबद और छतरियां मुगलकालीन वास्तुकला की खास पहचान को दर्शाती हैं।
लेकिन इस खूबसूरत इमारत का इतिहास इतना खूबसूरत नहीं है…

खुसरो बाग, प्रयागराज — मुगलकालीन वास्तुकला और इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर।
जहांगीर के शासनकाल में शहजादा खुसरो ने अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया था। विद्रोह के बाद उन्हें नजरबंद रखा गया और बाद में उनकी मृत्यु एक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बनी। ऐतिहासिक विवरणों में इस घटना को उनके भाई खुर्रम से जोड़ा जाता है, जो आगे चलकर शाहजहां बने।
वास्तुकला में भी छिपी है खास कहानी
खुसरो बाग के मकबरों में से निथार बेगम का मकबरा अपनी सजावट के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसकी छतों पर तारों की चित्रकारी और दीवारों पर फूलों व फारसी शैली की सजावट देखने को मिलती है।
दिलचस्प बात यह है कि निथार बेगम की कब्र इस मकबरे के अंदर मौजूद नहीं है।
आज खुसरो बाग सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि प्रयागराज की उस विरासत का हिस्सा है जहां मुगलकालीन सत्ता, परिवार, संघर्ष और कला—चारों की कहानी एक साथ दिखाई देती है।
खुसरो बाग की दीवारें आज भी कई सदियों पुरानी कहानी को अपने भीतर समेटे हुए हैं।
आप प्रयागराज के खुसरो बाग गए हैं? कमेंट में अपना अनुभव बताइए।

